आजम खान के बेटे को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार

उच्च न्यायालय ने बसपा प्रत्याशी नवाज काजिम अली खां को हराने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां का निर्वाचन इस आधार पर रद्द कर दिया था कि उनकी आयु कम थी और वह 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां की याचिका पर निर्वाचन आयोग और रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर पराजित हुए बसपा के नवाज काजिम अली खां नोटिस जारी किए। दोनों को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना है। पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई की जाएगी क्योंकि स्कूल रिकॉर्ड के अलावा कुछ अन्य दस्तावेज पेश करके यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि अब्दुल्ला आजम खां चुनाव लड़ने के योग्य थे। ये दस्तावेज पेश करके उनके चुनाव लड़ने की पात्रता के बारे में कुछ संशय पैदा किया गया है। पीठ ने कहा, ‘हमने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला पढ़ा है, यह साक्ष्य पर आधारित है।’ अब्दुल्ला खां ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए 17 दिसंबर को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि 2017 के चुनाव के लिये नामांकन पत्र दाखिल करते समय वह 25 साल के नहीं हुए थे और इसलिए वह विधानसभा का चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। उच्च न्यायालय ने अपने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया था कि निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को आगे की कार्रवाई के लिए इस फैसले से अवगत कराया जाए।